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खुद बोल नहीं सकते, पर कामयाबी मचा रही शोर

जागरणसंवाददाता,बोकारो:आशालताकेंद्रसेक्टरपांचकेमूक-बधिकविद्यार्थियोंनेशिक्षाकेसहारेचुनौतियोंकोअवसरमेंबदलदिया।केंद्रमेंसांकेतिकशिक्षाहासिलकरसफलताकीराहपरइन्होंनेकदमबढ़ाए।भलेहीयेखुदबोलवसुननहींसकते,लेकिनइननिश्शब्दविद्यार्थियोंकीकामयाबीशोरमचाकरइनकाहौसलाबढ़ारहीहै।केंद्रकेमूक-बधिकविद्यार्थीपंकजकुमारनेभारतीयरेलवेऔरस्वीटीकुमारीनेबिहारसचिवालयमेंनियोजनहासिलकिया।वहींपुष्पराजएकनिजीकंपनीमेंप्रबंधककेरूपमेंकार्यरतहैं।राहुलकुमारगुजरातमेंकंप्यूटरसहायकवराजेशकुमारएकनिजीबैंकमेंहैं।गौतमराजग्राफिकडिजाइनरकेरूपमेंकामकररहेहैं।मंजूकुमारीइसकेंद्रमेंहीशिक्षिकाहैं।

बीएसएलकेसेवानिवृत्तअधिकारियोंकामिलासाथ:बीएसएलकेसेवानिवृत्तअधिकारीसहनिदेशकभवानीशंकरजायसवाल,विद्युतभूषण,ओपीगुप्ता,जीकेउपाध्यायआदिकेंद्रकासंचालनकरतेहैं।विद्युतभूषणदिव्यांगविद्यार्थियोंकोगणितपढ़ातेहैं।सेवानिवृत्तअधिकारीदिव्यांगविद्यार्थियोंकाकुशलमार्गदर्शनकरतेहैं।इन्हेंबेहतरशिक्षाप्रदानकरनेकेसाथहीइन्हेंरोजगारसेजोड़नेकाप्रयासकरतेहैं।करियरकेविकल्पकीजानकारीदेतेहैं।इनकेप्रयाससेदिव्यांगविद्यार्थीशिक्षाकेसहारेसमाजकीमुख्यधारासेजुड़रहेहैं।निजीवसरकारीप्रतिष्ठानमेंबेहतरस्थानहासिलकरसामान्यतरीकेसेजीवनगुजर-बसरकररहेहैं।

दिव्यांगोंकेलिएप्लेसमेंटकीव्यवस्था:केंद्रकीओरसेयूथफारजाबसंस्थाकेसाथमिलकरदिव्यांगोंकेलिएप्लेसमेंटकीव्यवस्थाकीगईहै।संस्थाकेदीपककुमारबर्मननेकहाकिदिव्यांगोंकोरांचीमेंनिश्शुल्कआवासीयआनजाबट्रेनिगदीजातीहै।इसकेबादइन्हेंनिजीकंपनियोंमेंनियोजनकाअवसरउपलब्धकरायाजाताहै।संस्थाकीओरसेआशालताकेंद्रकेमूक-बधिकविद्यार्थीशिवमकुमार,विजयकुमार,सिनोदकुमारयादववसत्यमकुमारबोकारोमेंएकनिजीकंपनीकेआउटलेटमेंकार्यरतहैं।इसकेअलावालगभगएकदर्जनदिव्यांगविद्यार्थियोंकोनिजीकंपनियोंमेंरोजगारसेजोड़ागयाहै।